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| Scope | International |
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| Language | English, Hindi |
| Country | India |
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Recent Articles
Search Articlesसिख राज की तालीमी विरासत: Maharaja Ranjit Singh की सरपरस्ती और तालीम का फैलाव
18वीं सदी के बीच तक पंजाब के सिखों के पास कोई एक मज़बूत सियासी क़यादत नहीं थी। हालां कि तरना दल, बुढ़ा दल और दल खालसा ने सिखों को एक अलग पहचान और संगठन दिया था, लेकिन मिसल दौर में सिखों की सियासी एकता अब्दाली के हमलों के सामने ज़्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी। अहमद शाह अब्दाली ने पंजाब पर आठ बार हमले किए। इन हमलों से पंजाब की ज़िंदगी और अर्थव्यवस्था बुरी तरह तबाह हो गई। छोटा घल्लूघारा और बड़ा घल्लूघारा इस बात के गवाह हैं कि उस दौर में पंजाब में सिखों का खुलेआम बड़े पैमाने पर क़त्लेआम किया गया।...
केरल की कसावु साड़ी: सादगी में छिपी शान, सोने की लकीरों वाली संस्कृति की पहचान
केरल की पहचान है कसावु साड़ी (Kerala’s Kasavu Saree), जो अपनी सफेद चमक और सुनहरी किनारी के लिए जानी जाती है। ये सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि एक पूरी कहानी है। वो कहानी जो सदियों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। जब आप कसावु साड़ी पहनती हैं, तो आप सिर्फ एक परिधान नहीं बल्कि आप अपने ऊपर केरल की 500 साल पुरानी विरासत को सजाती हैं। Image-pinterest.com कसावु शब्द सुनते ही दिमाग में एक ख़ास इमेज बनती है चमकदार सफेद रंग, जिस पर सोने की ज़री (zari) की बनी हुई किनारी। ये साड़ी अपनी Minimal डिजाइन के लिए...
Tripura Risa: The Handwoven Heritage That Carries History, Identity and Pride
In the lush hills of Northeast India, Tripura is home to 19 distinct tribal communities, each carrying its own traditions, stories and artistic expressions. At the heart of this cultural landscape is the age-old practice of handloom weaving. For generations, women have created intricate textiles on the traditional loin loom, turning threads into patterns that preserve memories of rivers, mountains, festivals and ancestors.
हरिवंश राय बच्चन: ‘मधुशाला’ से हिंदी साहित्य को नई पहचान देने वाले कवि
हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य की हालावादी काव्यधारा के उन मशहूर कवियों में शुमार होते हैं, जिनकी शायरी में ज़िंदगी, मोहब्बत, दर्द, उम्मीद और इंसानी जज़्बात का ख़ूबसूरत मेल दिखाई देता है। आसान ज़बान और दिल को छू लेने वाले अंदाज़ ने उन्हें आम पाठकों के बीच भी बेहद मक़बूल बनाया। हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवंबर 1907 को इलाहाबाद के चक मोहल्ले में एक संभ्रांत कायस्थ परिवार में हुआ था। उनका नाम ‘हरिवंश राय’ रखा गया, जबकि घर में प्यार से उन्हें ‘बच्चन’ पुकारा जाता था। आगे चलकर यही नाम उनकी अदबी...
अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ां: शायरी में वतनपरस्ती और ज़िंदगी में शहादत
“कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे, आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे।” ये अल्फ़ाज़ उस जांबाज़ क्रांतिकारी के हैं, जिसने महज़ 27 साल की उम्र में मुल्क की आज़ादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। शहीद अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ां न सिर्फ़ हिंदुस्तान की आज़ादी की लड़ाई के बहादुर सिपाही थे, बल्कि एक बेहतरीन उर्दू शायर भी थे। ‘हसरत’ तख़ल्लुस से लिखने वाले अशफ़ाक़ की शायरी में वतन से मोहब्बत, आज़ादी की तड़प और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ बग़ावत साफ़ दिखाई देती है। 22 अक्टूबर 1900 को शाहजहांपुर में पैदा हुए...
The Woman Who Sold Her Jewellery to Build India’s First Film
She sold every piece of gold she owned, and what she bought with it was a nation’s cinema. In 1913, inside a cramped studio in Nashik, Dadasaheb Phalke was racing against money, daylight and doubt to finish Raja Harishchandra. This film would later be called India’s first full-length feature. Beside him, night after night, worked a woman whose name most Indians still do not know. Her name was Saraswatibai Phalke, and without her the film almost certainly would not exist.
1904 से 1947 तक: ऐसे बना भारत का तिरंगा, जो आज हमारी पहचान है
भारत का 80वें स्वतंत्रता दिवस 2026 के जश्न के बीच, जब तिरंगा हवा में लहराता है, तो हमारे दिल में देश के लिए मोहब्बत और गर्व का एहसास होता है। तीन रंगों वाला ये झंडा आज भारत की सबसे बड़ी पहचान में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज़ादी से पहले भारत का झंडा कई बार बदला था?
पद्मनाभपुरम महल: लकड़ी का अद्भुत ख़ज़ाना, केरल के शाही विरासत की शानदार मिसाल
केरल (Kerala) के पूर्व राजाओं की ये शानदार विरासत है पद्मनाभपुरम महल (Padmanabhapuram Palace)। त्रावणकोर राजाओं का यह ऐतिहासिक महल आज भी अपनी भव्यता से सबको हैरान कर देता है। यह महल पूरी तरह से लकड़ी और पत्थर से बना है, जो केरल की पारंपरिक वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है। इस महल की नींव 1601 ईस्वी में रखी गई थी, जब इसे ‘कलकुलथु कोइक्कल’ (‘Kalkulathu Koikkal’) के नाम से जाना जाता था। राजा मार्तण्ड वर्मा (King Marthanda Varma) ने 1750 के आसपास इस महल का पुनर्निर्माण करवाया और इसे भगवान पद्मनाभ...
मुल्क राज आनंद: इंसानी बराबरी और मज़लूमों की आवाज़ उठाने वाले अज़ीम उपन्यासकार
मुल्क राज आनंद अंग्रेज़ी अदब के मशहूर हिंदुस्तानी उपन्यासकार और कहानीकार थे। उनकी तहरीरों में समाज के ग़रीब, मज़दूर, दलित और दबे-कुचले तबक़े की ज़िंदगी, उनकी मुश्किलात और बेहतर मुस्तक़बिल की जद्दोजहद साफ़ दिखाई देती है। उनकी रचनाओं में इंसानी बराबरी, आज़ादी और सामाजिक इंसाफ़ का पैग़ाम बार-बार सामने आता है। मुल्क राज आनंद की पैदाइश 12 दिसंबर 1905 को पेशावर में हुयी थी। उनका बचपन ऐसे माहौल में गुज़रा जहां उन्होंने समाज में मौजूद ऊंच-नीच और भेदभाव को क़रीब से देखा। यही तजुर्बे आगे चलकर उनकी अदबी...
पंडित दया शंकर नसीम: वो शायर जिसने ‘गुलज़ार-ए-नसीम’ से उर्दू मसनवी को नई पहचान दी
पंडित दया शंकर नसीम उर्दू अदब के उन ख़ास शायरों में शुमार होते हैं जिनकी शायरी में लखनवी तहज़ीब, ज़बान की नफ़ासत, ख़याल की बुलंदी और अल्फ़ाज़ की दिलकश रिआयत एक साथ नज़र आती है। 1811 ई.