आज के मॉडर्न दौर में, जहां हर छोटी-बड़ी इंडस्ट्री बिजली, डीज़ल या महंगे ईंधन पर निर्भर है, वहीं पंजाब के एक कोने में सदियों पुरानी एक कुदरती तकनीक आज भी काम कर रही है। इसे Sullar Gharat (सुल्लर घराट) कहा जाता है, जहां आटा चक्की बिना बिजली, डीज़ल या किसी भी तरह के ईंधन के सिर्फ़ बहते पानी (हाइड्रो एनर्जी) की ताक़त से चलती है। यहां बहने वाली नदी या नहर का पानी सिर्फ़ आम पानी नहीं, बल्कि ऊर्जा का एक बड़ा ज़रिया है, जो सदियों से लगातार इस चक्की को चलाता आ रहा है। ये पारंपरिक आटा चक्की कई सौ सालों...