पिछले आलेख में वर्ग और जाति के अंतर्संबंधों की चर्चा करते हुए हमने यह रेखांकित किया था कि वर्ग और वर्ग संघर्ष की अवधारणा को उसके संकीर्ण आर्थिक अर्थों तक सीमित करके नहीं समझा जा सकता। भारतीय समाज की जटिल संरचना में वर्गीय विश्लेषण के भीतर जाति, संस्कृति, जेंडर और जेनरेशन संबंधों जैसे आयामों को समाहित करना जरूरी है, तभी वर्ग संघर्ष की एक मुकम्मल तस्वीर हमारे सामने उभर सकती है। वर्ग केवल आय, संपत्ति और पेशे से निर्धारित नहीं होता। उसका संबंध सत्ता, श्रम, सम्मान और संसाधनों के वितरण से भी होता...