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ForwardPress.in Target Audience: Individuals from backward castes as well as readers and researchers on Indian subaltern issues and interests from a Phule-Ambedkar Dalitbahujan perspective. Since the issues are addressed from multi-faceted angles by multi-disciplinary contributors the target audience too will be from a wide range of disciplines and interests including, but not restricted to, anthropology, sociology, politics, economics, literature and folk culture. Source
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| Scope | Asian |
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| Language | English, Hindi |
| Country | India |
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Search ArticlesObituary: Rupi Soren and the long wait for Shibu’s homecoming
Dishom Guru Shibu Soren’s life partner Rupi Soren is no more. She passed away on 7 October 2026. She was married to Shibu Soren at a tender age and most of her youth was spent waiting for the return of her husband who was perpetually on the run from village to village and from jungle to jungle during his long battle against the bloodsucking moneylenders. They got married in 1962 and their first child, Durga Soren, arrived eight years later.
‘पीली छतरी वाली लड़की’ की जाति
उदय प्रकाश हिंदी साहित्य के एक मारूफ़ लेखक हैं। उनकी शिक्षा-दीक्षा सागर विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हुई। उनके चर्चित उपन्यास ‘पीली छतरी वाली लड़की’ की पृष्ठभूमि विश्वविद्यालय और वहां के छात्र जीवन से जुड़ा है।[1] हालांकि उपन्यास का शीर्षक महिला किरदार अंजलि जोशी के नाम से मंसूब है, जो कॉलेज में पीली छतरी ओढ़े आती थी, मगर लेखक ने एक मर्द किरदार को तरजीह दी है। राहुल और अंजलि दोनों सहपाठी हैं और हिंदी साहित्य में एम.ए. कर रहे थे। उपन्यास का पूरा प्लॉट राहुल के आस-पास ही...
आजीवक दर्शन : जिसकी पहचान भुला दी गई थी (पहला भाग)
उन्होंने लोगों के दिलों के पुरातन देवताओं के भय को निकाल दिया है। सोने और चांदी के गहनों से देवताओं की तस्वीरें गायब होने लगी हैं। भगवान को खुद अपने चोरी हो जाने का डर सताता रहता है।[1] आजीवक दर्शन को बॉशम ने गुमशुदा दर्शन कहा है। यह संभावना भी जताई है कि ‘आजीवक दर्शन’ इसका असली नाम नहीं है, बल्कि इसके विरोधियों द्वारा दिया गया है। बेणीमाधव बरुआ, एच यूई, हैनरिक जिमर आदि विद्वानों ने इसका असली नाम ‘आ-जीव’ (आजीव्य) दर्शन बताया है, जो इस दर्शन की वैचारिकी के काफी निकट प्रतीत होता है। लंबे समय से...
जातिगत जनगणना में ओबीसी कॉलम की मांग को लेकर दिसंबर में बड़े आंदोलन का ऐलान
गत 8 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ, बीसी वेलफेयर एसोसिएशन तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश तथा देशभर के विभिन्न ओबीसी संगठनों की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में देशभर से ओबीसी संगठनों के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में सर्वसम्मति के उपरांत घोषणा की गई कि आगामी 14 दिसंबर, 2026 को जंतर-मंतर पर धरना और 15 दिसंबर, 2026 को संसद तक महामोर्चा निकाला जाएगा। बैठक में प्रमुख रूप से बिहार के सांसद पप्पू यादव, सीपीआई के पूर्व सांसद डी.
अलबेले अर्थशास्त्री डॉ. आंबेडकर (संदर्भ : रुपए की समस्या, उद्गम और समाधान, दूसरा भाग)
आंबेडकर लिखते हैं, “यह साफ़ है कि भारतीय मुद्रा के विकास के क्रम में कैसे चांदी (रजत) का मानक लागू हुआ और कैसे सोने की मुद्रा की मांग के बाद रजत मानक के साथ-साथ कागज़ी मुद्रा भी शुरू की गई। इस तरह की मिली-जुली प्रणाली के कामकाज को समझने से पहले, इसके ढांचे की प्रकृति पर संक्षेप में नज़र डालना उपयोगी होगा। इसके धातु वाले हिस्से को 1870 के अधिनियम-23 के तहत नियंत्रित किया गया था। इसके तहत सिक्कों को मंज़ूरी दी गई और उन्हें कानूनी मान्यता मिली। इस अधिनियम ने टकसालों द्वारा जारी सिक्कों की संख्या...
खड़ी बोली की कविता जगत को चुनौती देतीं राजेश पाल की कविताएं
व्यवस्था में गांव गांव की व्यवस्था पहाड़ में ठाकुर पश्चिम में बंजारे पूरब में गड़ेरिये दक्खन के कोने में चमार उनके पीछे भंगी किसी खूंट में नाई, धोबी और झीवर[1]। गड़ेरिया टोले के राजेश पाल के काव्य संग्रह ‘तुम भी सोचो’ में संकलित ये काव्य पंक्तियां सिर्फ उत्तराखंड के गावों का बंटवारा नहीं है, बल्कि पूरा देश ही ऐसे बंटा है। बस रूप-रंग थोड़ा-थोड़ा अलग-अलग है। टोलों की तरह ही सबका मन भी ऐसे ही बंटा है। धन-धरती भी ऐसे ही बंटी है, यहां तक कि आधुनिक खड़ी बोली की कविता की दुनिया भी ऐसी बंटी है। जैसे...
संघर्ष के साथी का वियोग नहीं सह पाईं रूपी सोरेन
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी रूपी सोरेन नहीं रहीं। कल 7 अक्टूबर, 2026 को उनका देहांत हो गया। बहुत कम उम्र में उनका विवाह शिबू सोरेन से हुआ था और उनकी युवावस्था का बड़ा हिस्सा गुरुजी की प्रतीक्षा में ही गुजरा, क्योंकि गुरुजी महाजनी शोषण के खिलाफ चली लंबी लड़ाई के दौरान गांव-गांव, जंगल-जंगल भागते फिरते थे। उनका विवाह गुरुजी से 1962 में हुआ था और 8 वर्ष बाद उनकी पहली संतान दुर्गा सोरेन का जन्म हुआ था। वह महाजनी शोषण के खिलाफ चले संघर्ष के चरम दिन थे। उन्हीं दिनों उन्होंने धनबाद जिले के...
आरएसएस की कथनी और करनी का भेद बताती किताब
चर्चित आत्मकथा ‘मैं एक कारसेवक था’ के लेखक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व कार्यकर्ता, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी की नई किताब एक साथ कई खुलासे करती है। किताब का नाम है– ‘आंबेडकरवाद की रोशनी में आरएसएस का द्विज राष्ट्रवाद : परत-दर-परत पड़ताल’। यथा नाम इस किताब में भंवर मेघवंशी बताते हैं कि कैसे शुरुआत से डॉ.
Savitribai Phule: The Mother of Indian English
The Phule-Ambedkar Centre for Philosophy and English Training (PACPET), Tellapur, Hyderabad, will celebrate the 209th Indian English Day by declaring Savitribai Phule as the Mother of Indian English at the PACPET campus on 4 October 2026. Indian English Day – the anniversary of the starting of the first English-medium school in India – falls on Monday, the 5th, but we are celebrating it on Sunday due to the availability of the participants.
सावित्रीबाई फुले : भारत में अंग्रेजी शिक्षा की जननी
हैदराबाद के तेल्लापुर में स्थित फुले-आंबेडकर सेंटर फॉर फिलोसफी एंड इंग्लिश ट्रेनिंग (पैकपेट) 209वें भारतीय अंग्रेजी दिवस को सावित्रीबाई फुले को भारत में ‘अंग्रेजी शिक्षा की जननी’ घोषित करने जा रहा है। भारतीय अंग्रेजी दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन सेंटर के कैंपस में आगामी 4 अक्टूबर, 2026 को किया जाएगा। वैसे तो भारतीय अंग्रेजी दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है, मगर हम यह आयोजन 4 अक्टूबर को इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उस दिन इतवार है और इस कारण कार्यक्रम में अपेक्षाकृत अधिक भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।...