असम के शिवसागर जिले के एक छोटे से ग्रामीण इलाके में एक लड़का बड़ा हो रहा था। उसकी दुनिया बहुत बड़ी नहीं थी। सरकारी स्कूल था, गांव का माहौल था, स्थानीय भाषा थी और समाज के साथ गहरा जुड़ाव था। पिता सरकारी नौकरी में थे, मां गृहिणी थीं। घर में संसाधन भले सीमित रहे हों, लेकिन मूल्यों की कमी नहीं थी। अनुशासन, समय की पाबंदी, मेहनत और व्यवहार—ये बातें सचिन गोगोई को अपने माता-पिता से विरासत में मिलीं। उनका बचपन असम के इतिहास के एक उथल-पुथल भरे दौर में बीता। 1980 और 90 के दशक का असम आंदोलन, उग्रवाद,...