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Articles by Shiv Kharwar
समय का तकाजा कहता है भुलादे
समय का तकाजा कहता है भुलादे मैं कहता हूं ना भूलूंगा चाहे रुलादे चाहें जग सूना करदे, मुश्किल जीना करदे चाहे कर दे बेहाल ज़िंदगी बिना लब्ज़ के गूंगा करदे! मैं कहता हूं ना भूलूंगा, चाहे दूरियां हज़ार गुन...
“एक साथ कुछ लोगो को मुर्ख बनाया जा सकता है पूरी आवाम को नहीं”
एक बार राहत इंदौरी साहेब ने लिखा था "मैं जब मर जाऊं तो, मेरी अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पैशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना" इस एक लाइन में उन्होंने देश की प्रति अपने अनन्य प्रेम को क्या बखूबी लिखा है।
India’s Picture Of ‘Vasudhaiv Kutumbakam’ Is Still Incomplete
भोग को तिलांजलि देने वाली भूमि के नाम से विख्यात भारत यानि की इंडिया अपने कर्म प्रधानता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्व प्रसिद्द श्रीमद्भागवतगीता में भी इसके अनूठे उदाहरण मौजूद हैं। एक बार महात्मा गांधी ने कहा था, “पृथ्वी मनुष्य की उन तमाम ज़रूरतों को पूर्ण करने के लिए सक्षम है, जो उनके विकास के लिए आवश्यक हैं किन्तु उनकी लोलुपता को नहीं।” कमोवेश यह बात हमारे भारतीय राष्ट्र पर भी लागू होती है, क्योंकि वैश्विक पटल पर भारत की छवि एक सॉफ्ट स्टेट की है, जो अपनी जटिल सामाजिक संरचना, सांकृतिक...
Society Has Considered Women As Mere Objects Of Enjoyment In The Boundary Wall Of Culture.
विश्व की आधी आबादी और समाज में संतुलन कायम रखने वाली, शांत रह कर सबकी बात सुनने वाली एवं पुरुष को जन्म देने वाली स्त्री को पुरुषवादी सोच ने समाज की चारदीवारी में सदियों से लॉकडाउन किया है। जिसकी जड़े काफी पुरानी हैं। आज जब विश्व के 118 देश कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं और प्रत्येक व्यक्ति इससे संक्रमित होने से स्वयं को बचाने के लिए प्रयासरत है। जबकि संक्रमण से बचने का अनेक देशों के पास केवल एक ही विकल्प दिख रहा है, जिसे लॉकडाउन का नाम दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत लोगों को घर की...
Poem: The Silent Tears
Image for representation only. The streets they are littered, With much pomp and fanfare. As urchins scavenge for food, In bins of waste all bare, In a tiff with the mongrels, Snatching crumbs from their snare. Naked in the biting cold, Wanting someone to share, An embrace of warmth, And some milk to spare. The inns are full of revellers, All waiting to play dare, As joy plays truant, For those beyond the glare.
“काश जयप्रकाश नारायण जैसा नेता फिर से बिहार में जन्म लेता”
जेपी के नाम से विख्यात जयप्रकाश नारायण का जन्म बिहार के सारण ज़िले में 1902 में हुआ था। जेपी के लिए देशहित और लोगों के उत्थान से बढ़कर कुछ नहीं था। जय प्रकाश नारायण बिहार के बेटे थे, जिसने इंदिरा गाँधी जैसी ताकतवर महिला को भी 75 साल की उम्र में नाको तले चने चबाने पर मजबूर कर दिया था मगर अफसोस कि उसी जेपी आंदोलन से निकले नेता आज बिहार में राजनीति का स्तर इतना गिरा चुके हैं कि शर्म आती है। हम बिहारियों की बदहाली और विफलता का मॉडल दिखाकर दुनिया के सामने हंसी उड़ाने वालों, यह मत भूलो कि जब-जब...
Wondering What The Tanishq Controversity Is All About? Here’s All You Need To Know
Religious violence has been one of the major concerns in India, particularly between Hindus and Muslims and it has taken the form of religious rioting. This dispute saw another day when social media had a hashtag “Boycott Tanishq” trending on Monday. A number of netizens were calling for a ban on the 45-second ad of Tanishq, featuring a Hindu-Muslim interfaith marriage.
“हाथरस की घटना एक महिला का बलात्कार नहीं, बल्कि न्याय का बलात्कार है”
बात बीते कुछ दिन पूर्व की है, जब उत्तर प्रदेश के हाथरस में संदीप, रवि, रामू औक लवकुश नाम के दरिन्दों द्वारा एक 19 साल की लड़की के साथ बलात्कार की हैवानियत की गई। यह वारदात पिछली घटनाओं से भी बढ़कर मानवता को शर्मसार करती है। भारत की 50% आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला नोची जाती है, काटकर फेक दी जाती है, रौंदी जाती है। इधर उफ्फ तक नहीं की जाती है, बल्कि इसके बावजूद हम बड़े फख्र से कहते हैं कि हमारी सभ्यता श्रेष्ट में भी श्रेष्ट है। ऐसा क्यों होता है?
भारत में काफी पुराना है सेक्स वर्क का व्यापार
आज भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के ज़्यादातर देशों में सेक्स वर्क एक आम बात हो गई है। महिलाओं और लड़कियों को इन वेश्यालयों की शोभा माना जाता है। इन वेश्यालयों में महिलाओं की ऊंची बोली लगाकर उन्हें खरीद लिया जाता है, फिर उन्हें मजबूर किया जाता है कि वे इस पेशे में आ जाएं। यदि वे ऐसा करने के लिए राज़ी नहीं होती हैं, तो उन्हें नशीली दवाओं या किसी अन्य प्रकार का भय दिखाकर यौन सम्बन्ध बनाने के लिए विवश किया जाता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सेक्स वर्क हमारे भारतीय समाज में कोई नया शब्द नहीं है। इसका वर्णन...
“आसान नहीं है बिहार विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं को नज़रअंदाज़ करना”
यह शायद कई लोगों के लिए एक रहस्योद्घाटन होगा कि बिहारी मुस्लिम मतदाता पूरे बिहार की 100 विधानसभा सीटों पर जीत और हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जबकि 50 सीटें एसी हैं जहां पर मुस्लिम मतदाता वह न्यूनतम 18 प्रतिशत से लेकर अधिकतम 74 प्रतिशत तक हैं। फिर भी बिहार राज्य के राजनीतिक क्षेत्र में बिहारी मुस्लिम का हिस्सा अब तक उनकी जनसंख्या के आधार पर बहुत कम रहा है और लगातार यह घटता ही जा रहा है।जब मुसलमानों के प्रतिनिधत्व की बात आती है, सभी धर्मनिरपेक्ष दलों के राजनीतिक तौर तरिके पर प्रश्नचिह्न...
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