मै पत्रकारिता मेँ बीते 30 सालो से हूँ. मध्य प्रदेश के मालवा के गाँवों मेँ घूमना और जमीन मेँ दबे आम इंसान के सरोकार पर खबर बनाना मेरा शौक है.
नील गाये अफीम के डोडो को खाकर कैसी मदमस्त हो जाती है और फिर कैसे वो जंगल मेँ तांडव करती है इसे दुनिया के सामने सबसे पहले मै लाया.ये मामला किसानो से जुड़ा है.जिसे अन्नदाता कहते है वो ज़मीन पर कितनी मुश्किलें उठाकर अन्न उपजाता है इससे जुड़े कई अनछुए पहलूओ को मैंने उजागर किया.
मालवा की धरती पर हुए किसान आंदोलन को सबसे पहले देश और दुनिया तक पहुंचाया, और लेखक शोभा डे के 180 किलो के पुलिस वाले को भी सबसे पहले मैंने ढूंढा.