कभी हमारी देसी थाली में चना था, जौ-बाजरा था, दालें थीं, मोटे अनाज थे। मतलब फाइबर अपने आप आ जाता था, लेकिन आज प्लेट में मैदा, चीनी, पैकेट वाले स्नैक्स और प्रोसेस्ड फूड बढ़ गए हैं। नतीजा पेट फूलना, सुस्ती, कब्ज और मेटाबॉलिक बीमारियां जकड़ रही हैं। इन दिनों सोशल मीडिया पर नया ट्रेंड चल पड़ा है 'फाइबर-मैक्सिंग' यानी थाली में फाइबर को मैक्सिमम करना। डॉक्टर्स और डाइटीशियन भी कह रहे हैं कि शरीर को रोज करीब 30 से 40 ग्राम फाइबर चाहिए, लेकिन ज्यादातर भारतीय मुश्किल से करीब 15 ग्राम तक ही पहुंच पाते...